रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं
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Ayodhya Kand

श्री सीता-राम संवाद

चौपाई : मातु समीप कहत सकुचाहीं। बोले समउ समुझि मन माहीं॥ राजकुमारि सिखावनु सुनहू। आन भाँति जियँ जनि कछु गुनहू॥1॥…

श्री राम-कौसल्या संवाद

अति बिषाद बस लोग लोगाईं। गए मातु पहिं रामु गोसाईं॥ मुख प्रसन्न चित चौगुन चाऊ। मिटा सोचु जनि राखै राऊ॥4॥ सभी…

श्री राम-कैकेयी संवाद

करुनामय मृदु राम सुभाऊ। प्रथम दीख दुखु सुना न काऊ॥ तदपि धीर धरि समउ बिचारी। पूँछी मधुर बचन महतारी॥2॥ श्री…

दशरथ-कैकेयी संवाद और दशरथ शोक, सुमन्त्र का महल में जाना और वहाँ से लौटकर श्री…

छन्द : केहि हेतु रानि रिसानि परसत पानि पतिहि नेवारई। मानहुँ सरोष भुअंग भामिनि बिषम भाँति निहारई॥ दोउ बासना रसना…

कैकेयी का कोपभवन में जाना

दोहा : बड़ कुघातु करि पातकिनि कहेसि कोपगृहँ जाहु। काजु सँवारेहु सजग सबु सहसा जनि पतिआहु॥22॥॥ पापिनी मन्थरा ने…

राम राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की व्याकुलता तथा सरस्वती से उनकी प्रार्थना

दोहा: सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं मनाइ महेसु। आप अछत जुबराज पद रामहि देउ नरेसु॥1॥ सबके हृदय में ऐसी अभिलाषा है…

मंगलाचरण

द्वितीय सोपान - मंगलाचरण यस्यांके च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके भाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि…

अयोध्याकांड

अयोध्याकांड में श्रीराम वनगमन से लेकर श्रीराम-भरत मिलाप तक के घटनाक्रम आते हैं। अयोध्या काण्ड में 1 श्लोक, 314…