रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं
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Ayodhya Kand

भरतजी का मन्दाकिनी स्नान, चित्रकूट में पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिता का…

लखन राम सियँ सुनि सुर बानी। अति सुखु लहेउ न जाइ बखानी॥ इहाँ भरतु सब सहित सहाए। मंदाकिनीं पुनीत नहाए॥2॥…

श्री सीताजी का स्वप्न, श्री रामजी को कोल-किरातों द्वारा भरतजी के आगमन की सूचना,…

उहाँ रामु रजनी अवसेषा। जागे सीयँ सपन अस देखा॥ सहित समाज भरत जनु आए। नाथ बियोग ताप तन ताए॥2॥ उधर श्री रामचंद्रजी…

भरतजी चित्रकूट के मार्ग में

एहि बिधि भरत चले मग जाहीं। दसा देखि मुनि सिद्ध सिहाहीं॥ जबहि रामु कहि लेहिं उसासा। उमगत प्रेमु मनहुँ चहु पासा॥3॥…

इंद्र-बृहस्पति संवाद

देखि प्रभाउ सुरेसहि सोचू। जगु भल भलेहि पोच कहुँ पोचू॥ गुर सन कहेउ करिअ प्रभु सोई। रामहि भरतहि भेंट न होई॥4॥…

निषाद की शंका और सावधानी

चौपाई : सई तीर बसि चले बिहाने। सृंगबेरपुर सब निअराने॥ समाचार सब सुने निषादा। हृदयँ बिचार करइ सबिषादा॥1॥ रात…