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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः | हरिनाम माला स्त्रोत

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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः , यह श्री भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण दोनों का मंत्र है। इसमें दो परंपराएं हैं – तांत्रिक और पुराणिक। तांत्रिक परम्पराओं में ऋषि प्रजापति आते है और पुराणिक पंरपरा में ऋषि नारद जी आते है। हालांकि, दोनों कहते हैं कि यह सर्वोच्च विष्णु मंत्र है।

‘श्रीमद् भगवतम्’ के 12 अध्याय को इस मंत्र के 12 अक्षर के विस्तार के रूप में लिए गए है। इस मंत्र को मुक्ति का मंत्र कहा जाता है और मोक्ष प्राप्त करने के लिए एक आध्यात्मिक सूत्र के रूप में माना जाता है। यह मंत्र ‘श्रीमद् भगवतम्’ का प्रमुख मंत्र है इस मंत्र का वर्णन विष्णु पुराण में भी मिलता है।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

अर्थात : वासुदेव भगवान! अर्थात् जो वासुदेव भगवान नर में से नारायण बने, उन्हें मैं नमस्कार करता हूँ। जब नारायण हो जाते हैं, तब वासुदेव कहलाते हैं।

मंत्र का अर्थ:
ओम – ओम यह ब्रंह्माडीय व लौकीक ध्वनि है।
नमो – अभिवादन व नमस्कार।
भगवते – शक्तिशाली, दयालु व जो दिव्य है।
वासुदेवयः – वासु का अर्थ हैः सभी प्राणियों में जीवन और देवयः का अर्थ हैः ईश्वर। इसका मतलब है कि भगवान (जीवन/प्रकाश) जो सभी प्राणियों का जीवन है।

राजा बलि ने हरिनाम माला स्त्रोत की रचना की थी । श्री हरि के नाम जप से मनुष्य के सारे पाप मिट जाते है तथा उसके समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। और अंत समय में मनुष्य को श्री हरी के बैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है।  श्री हरि ही समस्त चराचर जगत के स्वामी है। उनकी इच्छा मात्र से अनंत ब्रह्माण्ड का निर्माण होता है और इच्छा मात्र से ही अनंत ब्रम्हांड का विनाश होता है।

पंडित जसराज जी के स्वर में आप इस स्त्रोत को सुन सकते हैं।
यह भीमपलासी राग में गाया हुआ बहुत ही सुन्दर भजन है।

हरिनाम माला स्त्रोत

॥ १ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
गोविन्दं गोकुलानन्दं गोपालं गोपिवल्लभम् ।
गोवर्धनोद्धरं धीरं तं वन्दे गोमतीप्रियम् ॥

॥ २ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
नारायणं निराकारं नरवीरं नरोत्तमम् ।
नृसिंहं नागनाथं च तं वन्दे नरकान्तकम् ॥

॥ ३ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
पीताम्बरं पद्मनाभं पद्माक्षं पुरुषोत्तमम् ।
पवित्रं परमानन्दं तं वन्दे परमेश्वरम् ॥

॥ ४ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
राघवं रामचन्द्रं च रावणारिं रमापतिम् ।
राजीवलोचनं रामं तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥

॥ ५ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
वामनं विश्वरूपं च वासुदेवं च विठ्ठलम् ।
विश्वेश्वरं विभुं व्यासं तं वन्दे वेदवल्लभम् ॥

॥ ६ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
दामोदरं दिव्यसिंहं दयालुं दीननायकम् ।
दैत्यारिं देवदेवेशं तं वन्दे देवकीसुतम् ॥

॥ ७ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
मुरारिं माधवं मत्स्यं मुकुन्दं मुष्टिमर्दनम् ।
मुञ्जकेशं महाबाहुं तं वन्दे मधुसूदनम् ॥

॥ ८ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
केशवं कमलाकान्तं कामेशं कौस्तुभप्रियम् ।
कौमोदकीधरं कृष्णं तं वन्दे कौरवान्तकम् ॥

॥ ९ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
भूधरं भुवनानन्दं भूतेशं भूतनायकम् ।
भावनैकं भुजंगेशं तं वन्दे भवनाशनम् ॥

॥ १० ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
जनार्दनं जगन्नाथं जगज्जाड्यविनाशकम् ।
जामदग्न्यं परं ज्योतिस्तं वन्दे जलशायिनम् ॥

॥ ११ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
चतुर्भुजं चिदानन्दं मल्लचाणूरमर्दनम् ।
चराचरगतं देवं तं वन्दे चक्रपाणिनम् ॥

॥ १२ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
श्रियःकरं श्रियोनाथं श्रीधरं श्रीवरप्रदम् ।
श्रीवत्सलधरं सौम्यं तं वन्दे श्रीसुरेश्वरम् ॥

॥ १३ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
योगीश्वरं यज्ञपतिं यशोदानन्ददायकम् ।
यमुनाजलकल्लोलं तं वन्दे यदुनायकम् ॥

॥ १४ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
शालिग्रामशिलाशुद्धं शंखचक्रोपशोभितम् ।
सुरासुरैः सदा सेव्यं तं वन्दे साधुवल्लभम् ॥

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय – ॥ १५ ॥
त्रिविक्रमं तपोमूर्तिं त्रिविधाघौघनाशनम् ।
त्रिस्थलं तीर्थराजेन्द्रं तं वन्दे तुलसीप्रियम् ॥

॥ १६ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
अनन्तमादिपुरुषं अच्युतं च वरप्रदम् ।
आनन्दं च सदानन्दं तं वन्दे चाघनाशनम् ॥

॥ १७ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
लीलया धृतभूभारं लोकसत्त्वैकवन्दितम् ।
लोकेश्वरं च श्रीकान्तं तं वन्दे लक्षमणप्रियम् ॥

॥ १८ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
हरिं च हरिणाक्षं च हरिनाथं हरप्रियम् ।
हलायुधसहायं च तं वन्दे हनुमत्पतिम् ॥

॥ १९ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
हरिनामकृतामाला पवित्रा पापनाशिनी ।
बलिराजेन्द्रेण चोक्त्ता कण्ठे धार्या प्रयत्नतः ॥

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