रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 2
रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 2 — गुरु, सरस्वती, गणेश, चन्द्रमा, गंगा और कामधेनु के स्मरण से यात्रा सफल होने का शुभ शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में तुलसीदास जी ने रामकथा के प्रसंगों को ऐसे दोहों में ढाला है कि हर दोहा प्रश्नकर्ता को सीधा संकेत दे जाता है। यह पहले सप्तक का दूसरा दोहा है। प्रथम सर्ग वंदना और मंगलाचरण से आरंभ होता है, इसलिए इसके अधिकांश दोहे शुभ फल के सूचक माने गए हैं।
यह दोहा विशेष रूप से यात्रा और मार्ग-प्रस्थान के शकुन से जुड़ा है।
मूल दोहा: गुरु सरसइ सिंधूर बदन ससि सुरसरि सुरगाइ। सुमिरि चलहु मग मुदित मन, होइहि सुकृत सहाइ॥२॥
शब्दार्थ:
- गुरु = गुरुदेव
- सरसइ = सरस्वती देवी
- सिंधूर बदन = सिंदूर जैसे मुख वाले (श्री गणेशजी)
- ससि = शशि (चन्द्रमा)
- सुरसरि = देवनदी (गंगाजी)
- सुरगाइ = सुरभि (कामधेनु गाय)
- मग = मार्ग, रास्ता
- सुकृत = पुण्य, सत्कर्म
- सहाइ = सहायक
सुमिरि चलहु मग मुदित मन = इनका स्मरण करके प्रसन्न मन से मार्ग पर चलो। होइहि सुकृत सहाइ = तुम्हारे पुण्य सहायक होंगे।
भावार्थ / व्याख्या:
गोस्वामी तुलसीदास जी इस दोहे में यात्रा आरंभ करने वाले साधक को छह मंगलकारी नामों का स्मरण करने का उपदेश देते हैं — गुरुदेव, सरस्वती देवी, श्री गणेशजी, चन्द्रमा, गंगाजी और कामधेनु।
इन सबका स्मरण करके प्रसन्न और निश्चिंत मन से अपने मार्ग पर आगे बढ़ो। मन में संशय या भय रखकर चलना यात्रा को कठिन बनाता है, जबकि श्रद्धा और प्रसन्नता से भरा मन मार्ग की कठिनाइयों को सहज बना देता है।
तुलसीदास जी आश्वासन देते हैं कि तुम्हारे अपने पूर्वकृत पुण्य ही मार्ग में तुम्हारे सहायक बनेंगे। अर्थात् जो व्यक्ति सत्कर्म करता है, उसकी यात्रा में अनजाने सहयोगी और अनुकूल परिस्थितियाँ स्वयं बनती चली जाती हैं।
शकुन फल:
यह शकुन यात्रा और प्रस्थान के लिए विशेष रूप से शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- यात्रा पर जाना या प्रस्थान का समय तय करना
- तीर्थयात्रा या धार्मिक प्रवास
- विदेश गमन, स्थानांतरण या नए स्थान पर बसना
- नए मार्ग या नई दिशा में कार्य आरंभ करना
- किसी से मिलने या कार्यवश बाहर जाने का निर्णय
इस दोहे के आने पर यात्रा निर्विघ्न और सफल होने का संकेत मिलता है। मार्ग में सहायता मिलेगी और उद्देश्य पूर्ण होगा। प्रस्थान से पूर्व गुरु और इष्ट का स्मरण अवश्य करें।
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