रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 1

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रामाज्ञा प्रश्न गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक दिव्य ग्रंथ है, जिसमें ७ सर्ग, प्रत्येक सर्ग में ७ सप्तक और प्रत्येक सप्तक में ७ दोहे हैं। इस ग्रंथ का उपयोग प्राचीन काल से शकुन विचार और प्रश्न पूछने के लिए किया जाता रहा है। जब मनुष्य किसी विषय में मार्गदर्शन चाहता है, तो श्रद्धापूर्वक कोई संख्या चुनकर संबंधित दोहे से उत्तर प्राप्त करता है।

यह प्रथम दोहा पूरे ग्रंथ का मंगलाचरण है।

मूल दोहा: बानि बिनायकु अंब रबि गुरु हर रमा रमेस। सुमिरि करहु सब काज सुभ, मंगल देस बिदेस॥१॥

शब्दार्थ:

  • बानि = वाणी स्वरूपा भगवती सरस्वती
  • बिनायकु = विनायक (श्री गणेशजी)
  • अंब = अम्बा (माता पार्वती)
  • रबि = रवि (सूर्य भगवान)
  • गुरु = गुरुदेव
  • हर = हर (भगवान शंकर)
  • रमा = रमा (भगवती लक्ष्मी)
  • रमेस = रमेश (भगवान विष्णु)

सुमिरि करहु सब काज सुभ = इन सबका स्मरण करके शुभ कार्य करो। मंगल देस बिदेस = देश और विदेश में मंगल होगा।

भावार्थ / व्याख्या:

यह रामाज्ञा प्रश्न का मंगलाचरण है। गोस्वामी तुलसीदास जी यहाँ सबसे पहले उन दिव्य शक्तियों का स्मरण करा रहे हैं, जिनके आशीर्वाद से कोई भी कार्य सफल होता है।

वे कहते हैं कि भगवती सरस्वती (ज्ञान की देवी), श्री गणेशजी (विघ्नहर्ता), माता पार्वती, सूर्य भगवान, अपने गुरुदेव, भगवान शंकर, भगवती लक्ष्मी और भगवान विष्णु — इन सबका हृदय से स्मरण करके कोई भी शुभ कार्य आरंभ करो।

ऐसा करने से न केवल अपने देश में, बल्कि विदेश में भी सर्वत्र मंगल और कल्याण होगा। यह दोहा हमें सिखाता है कि किसी भी महत्वपूर्ण काम को शुरू करने से पहले दिव्य शक्तियों और गुरु का स्मरण करना चाहिए। इससे कार्य में बाधाएँ दूर होती हैं और सफलता मिलती है।

शकुन फल:

यह दोहा शुभ और मंगलकारी संकेत देता है। यदि आपका प्रश्न निम्नलिखित विषयों से संबंधित है, तो परिणाम अनुकूल रहने की प्रबल संभावना है:

  • नया कार्य या व्यवसाय शुरू करना
  • व्यापार में निवेश या विस्तार
  • यात्रा (देश या विदेश)
  • विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण आदि मांगलिक कार्य
  • शिक्षा या नौकरी संबंधी नए अवसर

इस दोहे के आने पर सामान्यतः कार्य में सफलता, बाधाओं का निवारण और चारों ओर शुभता रहने का संकेत मिलता है। विशेष रूप से जब प्रश्न सकारात्मक और रचनात्मक उद्देश्य से पूछा गया हो, तब यह दोहा अत्यंत शुभ माना जाता है।

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