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रामाज्ञा प्रश्न / तृतीय सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 7

रामाज्ञा प्रश्न तृतीय सर्ग सप्तक 2 श्लोक 7 — पंचवटी में वटवृक्ष तले सीता-लक्ष्मण सहित प्रभु की शोभा; समस्त मंगल देने वाला शुभ शकुन।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ पढ़ते समय दोहे का अर्थ और उसका शकुन-फल — दोनों को साथ रखकर विचार करना उचित माना गया है। प्रस्तुत दोहा तृतीय सर्ग के दूसरे सप्तक में सातवाँ स्थान पर है, जहाँ छल, कलह और आकस्मिक भय की चेतावनियाँ बार-बार मिलती हैं।

पंचवटी में वटवृक्ष के नीचे प्रभु की शोभा — प्रश्न-फल शुभ है।

मूल दोहा: पंचबटी बट बिटप तर सीता लखन समेत। सोहत तुलसीदास प्रभु सकल सुमंगल देत॥७॥

शब्दार्थ:

  • पंचबटी = पंचवटी
  • बट बिटप = वटवृक्ष
  • तर = के नीचे
  • समेत = के साथ
  • सोहत = सुशोभित हैं
  • सकल सुमंगल = समस्त मंगल
  • देत = प्रदान करते हैं

पंचबटी बट बिटप तर = पंचवटी में वटवृक्ष के नीचे। सकल सुमंगल देत = वे समस्त मंगल प्रदान करते हैं।

भावार्थ / व्याख्या:

तुलसीदास जी कहते हैं कि पंचवटी में एक वटवृक्ष के नीचे श्रीजानकीजी तथा लक्ष्मणजी के साथ प्रभु सुशोभित हैं, और वे समस्त मंगल प्रदान करते हैं।

इस सप्तक में शूर्पणखा का लंका जाना, रावण का षड्यंत्र और मारीच का कपट — सब अशुभ प्रसंग आए। परंतु अंतिम दोहा फिर मंगल पर आकर रुकता है।

यह तुलसीदास जी की विशेष शैली है — वे संकट का वर्णन करते हैं, पर अंत सदा आश्वासन पर करते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा शुभ है और बताता है कि चारों ओर चाहे जितनी उथल-पुथल हो, जो प्रभु के आश्रय में है वह सुरक्षित रहेगा और उसे समस्त मंगल प्राप्त होंगे।

शकुन फल:

यह प्रश्न-फल शुभ है और समस्त मंगल का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • अशांत वातावरण में भी अपनी सुरक्षा
  • परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन
  • किसी शरण, आश्रय या सुरक्षित स्थान की तलाश
  • चारों ओर संकट होने पर भी अपना कार्य
  • कोई भी शुभ कार्य या मांगलिक आयोजन

इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। चारों ओर चाहे जो भी हो, आप सुरक्षित रहेंगे और समस्त मंगल प्राप्त होंगे। श्रद्धा बनाए रखें।

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