Author name: Katha

॥ विविध ॥

श्रावण मास, शिवजी को अर्पित करते हैं 15 तरह के फूल

श्रावण मास में भगवन शिव की पूजा का विशेष महत्व रहता है। भगवान् शिव की पूजा में कुछ विशेष प्रकार के फूल एवं फल चढ़ाये जाते हैं। शिव पूजा में बहुत सी ऐसी चीजें अर्पित की जाती हैं जो अन्य किसी देवता को नहीं चढ़ाई जाती, जैसे- आक, बिल्वपत्र, भांग आदि। आइये जानते हैं भगवान शिव को कौन कौनसे फूल और पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।

श्रीराम की वानर सेना |
॥ धर्म चर्चा ॥

श्रीराम की वानर सेना

रावण के गुप्तचर ने 18,00,00,00,00,00,00,000 तो सेनापतियों की संख्या बताया था, इसके अलावा असंख्य बंदर थे। ये सब वानर बल में सुग्रीव के समान हैं और इनके जैसे करोड़ों हैं, श्री रामजी की कृपा से उनमें अतुलनीय बल है। वे तीनों लोकों को तृण के समान समझते हैं

॥ मंत्र एवं आरती ॥

श्री शिवानन्द लहरी

शिवानन्दलहरी आदि शंकराचार्य द्वारा विरचित शिव-स्तोत्र है। इसमें विभिन्न छन्दों के सौ श्लोक हैं। इसकी रचना आदि शंकर ने तब की थी जब वे श्रीशैलम में निवास कर रहे थे। यह मल्लिकार्जुन और भ्रमराम्बिका की स्तुति से आरम्भ होता है जो श्रीशैलम के अराध्य देवता हैं।

Mallikarjuna Jyotirling Temple
॥ धर्म परिक्रमा ॥

श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में द्वतीय स्थान पर है। यह आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर को दक्षिण का कैलाश पर्वत कहा गया है। महाभारत में दिए वर्णन के अनुसार श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव का पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ करने के सामान फल प्राप्त होता है। माता पार्वती का नाम ‘मल्लिका’ है और भगवान शिव को ‘अर्जुन’ कहा जाता है। इस प्रकार सम्मिलित रूप से वे श्रीमल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के नाम से यहाँ निवास करते है। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग देवी का महाशक्तिपीठ भी है। यहाँ माता सती की ग्रीवा (गरदन या गला) गिरी थी।

Lord-Hanuman Bajrang Baan
॥ मंत्र एवं आरती ॥

बजरंग बाण: पाठ करने से हर बाधा का अचूक निवारण होता है

माना जाता है कि श्री हनुमान जी अकेले एकमात्र देवता ऐसे देवता हैं कि जिनके पूजन कलियुग में तुरंत फल

Yudh Kaand
॥ वाल्मीकि रामायण ॥

श्रीमद वाल्मीकि रामायण: युद्धकाण्ड – सम्पूर्ण सर्गों की सूचि

सर्ग 1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये

Sundar Kaand
॥ वाल्मीकि रामायण ॥

श्रीमद वाल्मीकि रामायण: सुन्दरकाण्ड – सम्पूर्ण सर्गों की सूचि

सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका

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