श्रीमद वाल्मीकि रामायण: किष्किंधाकाण्ड – सम्पूर्ण सर्गों की सूचि
सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूककी ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरोंका […]
सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूककी ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरोंका […]
सर्ग 1: श्रीराम के सद्गुणों का वर्णन, राजा दशरथ का श्रीराम को युवराज बनाने का विचार सर्ग 2: राजा दशरथ
सर्ग 1: नारदजी का वाल्मीकि मुनि को संक्षेप से श्री राम-चरित्र सुनाना सर्ग 2: रामायण काव्य का उपक्रम, तमसा के
हमारा सनातन धर्म विविधता से परिपूर्ण है। ये वास्तव में एक जीवन पद्धति है। हर साल होने वाले तीज, त्यौहार,
संस्कृत में चमत्कार देखिये..! क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोटौठीडढण: । तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह ।। अर्थात्- पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल
उत्तरकाण्ड वाल्मीकि द्वारा रचित प्रसिद्ध हिन्दू ग्रंथ ‘रामायण‘ और गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘श्रीरामचरितमानस‘ का एक भाग (काण्ड या सोपान) है। उत्तरकाण्ड सर्ग तथा श्लोक
युद्ध काण्ड / लंका काण्ड वाल्मीकि द्वारा रचित प्रसिद्ध हिन्दू ग्रंथ ‘रामायण‘ और गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘श्रीरामचरितमानस‘ का एक भाग (काण्ड या सोपान) है।
सुन्दर काण्ड वाल्मीकि द्वारा रचित प्रसिद्ध हिन्दू ग्रंथ ‘रामायण‘ और गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘श्रीरामचरितमानस‘ का एक भाग (काण्ड या सोपान) है। सुन्दरकाण्ड सर्ग तथा
किष्किन्धा काण्ड वाल्मीकि द्वारा रचित प्रसिद्ध हिन्दू ग्रंथ ‘रामायण‘ और गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘श्रीरामचरितमानस‘ का एक भाग (काण्ड या सोपान) है। किष्किंधाकाण्ड सर्ग तथा
अरण्यकाण्ड वाल्मीकि द्वारा रचित प्रसिद्ध हिन्दू ग्रंथ ‘रामायण‘ और गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘श्रीरामचरितमानस‘ का एक भाग (काण्ड या सोपान) है। अरण्यकाण्ड में 75 सर्ग हैं, जिनमें 2,440 श्लोक गणना