शाबर मंत्र एवं माँ दुर्गा की साधना
नवरात्रि के नौ दिनों में शक्ति की भक्ति, साधना और उपासना की जाती है। इन नौ दिनों में की गई […]
नवरात्रि के नौ दिनों में शक्ति की भक्ति, साधना और उपासना की जाती है। इन नौ दिनों में की गई […]
नवरात्रो में माँ भगवती की पूजा की जाती है। माता की कृपा अपने परिवार पर सदैव बनाये रखने के लिए तथा माता को जल्द प्रसन्न करने के लिए रोज दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। यूँ तो हमें नित्य पूजा में दुर्गा चालीसा का पाठ, प्रतिदिन ही करना चाहिए, लेकिन चैत्र एवं शारदीय नवरात्र में तो यथा संभव दुर्गा चालीसा का पाठ करना ही चाहिए।
अपने हाथ में कोई अधिकार आये तो सबका भला करो। जितना कर सको, उतना भला करो। अपनी तरफ से किसी का बुरा मत करो, किसी को दुःख मत दो। गीता का सिद्धांत है-सर्वभूतहिते रताः प्राणिमात्र के हित में प्रीति हो। अधिकार हो, पद हो, थोड़े ही दिन रहने वाला है। सदा रहने वाला नहीं है। इसलिये सबके साथ अच्छे-से-अच्छा बर्ताव करो।
नारायण लक्ष्य है और लक्ष्मी जी उन तक पहुँचने का एक साधन। देवी शक्ति के आठ रूपों की पूजा के बहुत ही सकारात्मक परिणाम मिलता है। ये अष्ट लक्ष्मी है १.आदि लक्ष्मी, २.धन लक्ष्मी, ३. विद्या लक्ष्मी, ४. धान्य लक्ष्मी, ५. धैर्य लक्ष्मी, ६. संतान लक्ष्मी, ७. विजय लक्ष्मी एवं ८. राज लक्ष्मी या गज लक्ष्मी। अष्टलक्ष्मी स्तोत्र की रचना १९७० के आसपास दक्षिण भारत के Sri U. Ve. Vidvan Mukkur Srinivasavaradacariyar Svamikal ने किया था ।
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र, जिसे अयि गिरि-नन्दिनि स्त्रोत भी कहा जाता है इसकी रचना आदि शंकराचार्य ने किया था। इसकी रचना
भगवान् विष्णु के द्वारा किये जाने का भी वर्णन मिलता ह। कहा जाता है की जब देवी दुर्गा ने महिसासुर की संहार किया था तब भगवन से स्वयं भगवती की इस स्त्रोत से स्तुति की थी।
यह प्रसिद्ध तीर्थधाम ऐसी जगह पर स्थित है जहां अंटार्कटिका तक सोमनाथ समुद्र के बीच एक सीधी रेखा में भूमि को कोई भी हिस्सा नहीं है। यह तीर्थस्थल भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग में से पहला माना जाता है। इस मंदिर के निर्माण से कई धार्मिक और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसा माना जाता है कि, इस मंदिर का निर्माण खुद चन्द्रदेव सोमराज ने किया था, जिसका वर्णन ऋग्वेद में भी मिलता है।
हमारे हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रगट हुए स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप
श्री मधुराष्टकम् स्त्रोत अखण्ड भूमण्डलाचार्य जगद्गुरु महाप्रभु श्रीमद वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित है। संस्कृत में होने के बावजूद यह स्त्रोत गाने और समझने में एकदम आसान है। इसमें भगवन श्री कृष्ण और उनकी मनोहारी लीलाओं का वर्णन किया गया है।
सम्पूर्ण भारत में ४ मुख्य चौसठ योगिनी मंदिर हैं। २ अन्य मंदिरों का भी विवरण मिलता हैं लेकिन वे काम
चौसठ योगिनी का उल्लेख पुराणों में मिलता है जिनकी अलग अलग कहानियां है । इनको आदिशक्ति मां काली का अवतार