॥ कथा संग्रह ॥

हमारे रामायण, महाभारत, रामचरितमानस, श्रीमद्भवतगीता, मनुस्मृति, वेद, उपवेद, 200 उपनिषद, महापुराण अदि ग्रंथो में बहुत सारे रोचक और ज्ञानवर्धक प्रसंगो का उल्लेख है। आप यहाँ पर इन कथाओं का संग्रह पढ़ सकते है।

Devi-durga
॥ कथा संग्रह ॥

देवी दुर्गा के नवरुपों की कथा

नवरात्रि नौ दिनों का त्योहार है, जो हिंदू धर्म और संस्कृति में बहुत महत्व रखता है। यह हमारे सबसे प्राचीन त्योहारों में से एक है क्योंकि यह भगवान राम की जीत का जश्न मनाता है, जिन्होंने रावण पर अपनी लड़ाई से पहले देवी दुर्गा की पूजा की थीं। शारदीय नवरात्रि का त्योहार पूरे भारत में धूम धाम से मनाया जाता है। देवी दुर्गा के नौ अवतारों को समर्पित ये नौ दिन बहुत ही शुभ माने जाते हैं।

Garuda-The-Vahana-of-Lord-Vishnu
॥ कथा संग्रह ॥

गरुड़ भगवान् विष्णु के वाहन कैसे बने?

ये कथा है पक्षी राज गरुड़ की। उनका जन्म कैसे हुआ ? उन्होंने देवताओं से अमृत कलश क्यों छीना? फिर भी इन्द्र उनके मित्र क्यों बन गए ? वे विष्णु जी के वाहन कैसे बने ? 

Ganesh ji Katha in Hindi
॥ कथा संग्रह ॥

विघ्नहर्ता गणेश जी के जन्म की कथा

एकदंति हाथी के सर के कारन ही गणेश जी भी एकदन्त कहलाये।
हिन्‍दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्‍ल पक्ष चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्‍म हुआ था।
उनके जन्‍मदिवस को ही गणेश चतुर्थी कहा जाता है।

ravan-chandi puja
॥ कथा संग्रह ॥

जब एक अक्षर के कारन रावण की पराजय हो गयी

नवरात्रि की शुरुआत की कुछ कथाओं में से एक ये हैं की सबसे पहले भगवान राम ने शरद ऋतू नवरात्रि की पूजा लंका में विजय प्राप्त करने के लिए की थी भगवान राम ने नौ दिनों तक उपासना करने के बाद दसवें दिन लंका पर चढ़ाई करके विजय को प्राप्त किया था ।

makardhwaj-hanuman-fight
॥ कथा संग्रह ॥

बजरंगबली ब्रह्मचारी थें फिर भी एक पुत्र के पिता थें।

बिना विवाह करे हुए वे पिता कैसे बने इसके पीछे एक बहुत ही रोचक कथा है। कुछ विद्वानों के अनुसार वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस, दोनों में मकरध्वज का कहीं उल्लेख नहीं है।

Airavat Haathi
॥ कथा संग्रह ॥

पान और पान की उत्पत्ति की कथा

पान का आगे का भाग और तने वाला भाग में लक्ष्मी जी का वास होता है। यही कारण है कि पनबाड़ी (पान बेचने वाले) अपने यहां पान के आगे व पीछे का हिस्सा काटकर रख लेते हैं।

krishna-janm
॥ कथा संग्रह ॥

देवकी और वासुदेव के पूर्व जन्मों में भी उनके पुत्र थे भगवान श्रीकृष्ण

वासुदेव जी ने देखा कि उनके सम्मुख एक अद्भुत बालक है। उसके नेत्र कमल के समान कोमल और विशाल हैं। चार हाथों में शंख, गदा, चक्र और कमल धारण कर रखा है। वक्षस्थल पर श्रीवत्स का चिह्न अंकित है। गले में कौस्तुभमणि झिलमिला रही है।

Scroll to Top