64 योगिनी मंदिर, हीरापुर, उड़ीसा
सम्पूर्ण भारत में ४ मुख्य चौसठ योगिनी मंदिर हैं। २ अन्य मंदिरों का भी विवरण मिलता हैं लेकिन वे काम […]
भारत अनगिनत मंदिरो का देश है। हम अपने आस पास श्री राम, कृष्णा, विष्णु, शिव, दुर्गा, काली, गणेश तथा श्री हनुमान जी के मंदिर हर जगह देख सकते है। इन मंदिरो की तथा इन धार्मिक यात्राओं के बारे में आप यहां पढ़ सकते है।
सम्पूर्ण भारत में ४ मुख्य चौसठ योगिनी मंदिर हैं। २ अन्य मंदिरों का भी विवरण मिलता हैं लेकिन वे काम […]
धर्म ग्रंथों के स्वयं ब्रह्मांड के रचयिता ब्रह्मा जी ने, यहां ब्रह्मांड का पहला शिवलिंग स्थापित किया गया इस मंदिर में शिवलिंग स्थापना के बाद सबसे पहले स्वयं ब्रह्मा जी ने ही शिवलिंग का पूजन किया था। इस लिहाज से यह स्थान शिव भक्तों के लिए एक पावन तीर्थ है। इसलिए कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र की तीर्थ यात्रा इस मंदिर की यात्रा के बिना पूरी नही मानी जाती हैै।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित भगवान गणपति का यह विशेष मंदिर बैलाडिला की ढोलकल पहाड़ी पर स्थित है। भगवान गणेश का यह मंदिर जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा से 13 किमी दूर पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस मंदिर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित है जो ढोलक के आकार की बताई जाती है। इसी आकार के कारन गणेश जी को यहां ढोलकल गणेश के नाम से जाना जाता है। इस पूरी पहाड़ी को भी ढोलकल पहाड़ी कहा जाता है।
यह प्राचीन मंदिर ग्वालियर के करहिया क्षेत्र के जंगलों में स्थित है जो प्राकृतिक गुफाओं से परिपूर्ण है। लोक मान्यता के अनुसार यहां वह गुफा भी है जो रामायण काल में राम और रावण में हुए युद्ध की गाथा सुनाती हैं। आज भी मंदिर परिसर में अनवरत जल की धारा बहती है जो एक कुंड में पहुंचती हैं। यहां प्राचीन सात मंजिला इमारत बनी हुई है जिसे सतखंडा नाम से जाना जाता है।
भगवान गणेश की मूर्ति में सूंड बायीं तरफ रहती है, लेकिन सिद्धिविनायक गणेश जी की मूर्ति में सूड़ दाईं तरफ मुड़ी होती है। इस रूप को सिद्धपीठ माना जाता है और इस मंदिर को सिद्धिविनायक मंदिर कहा जाता है।
सबरीमाला मंदिर बेहद खूबसूरत है। कहा जाता है कि यह मंदिर 18 पहाडि़यों के बीच स्थित है और मंदिर के प्रांगण में पहुंचने के लिए भी 18 सीढि़यां पार करनी पड़ती हैं। सबरीमाला मंदिर में अयप्पा के अलावा मालिकापुरत्त अम्मा, गणेश और नागराजा जैसे देवताओं की भी मूर्तियां बनी हुई हैं।
18वीं सदी में आज जिस जगह मंदिर स्थित है तब वहाँ पर अरावली श्रृंखला की हरी-भरी पहाड़ियां हुआ करती थी घने वन व कलकल करते चश्मे बहते थे। अनेको पशु-पक्षियों का बसेरा हुआ करता था इस वन की सुंदरता व शांत वातावरण के कारण लोग यहाँ सैर करने आते थे।