Author name: Katha

श्री राम-भरतादि का संवाद
॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री राम-भरतादि का संवाद

दोहा : भरत बिनय सादर सुनिअ करिअ बिचारु बहोरि। करब साधुमत लोकमत नृपनय निगम निचोरि॥258॥ पहले भरत की विनती आदरपूर्वक […]

वनवासियों द्वारा भरतजी की मंडली का सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप
॥ श्री रामचरितमानस ॥

वनवासियों द्वारा भरतजी की मंडली का सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप

दोहा : सरनि सरोरुह जल बिहग कूजत गुंजत भृंग। बैर बिगत बिहरत बिपिन मृग बिहंग बहुरंग॥249॥ तालाबों में कमल खिल

Bhagvati-strot
॥ मंत्र एवं आरती ॥

श्री भगवती स्तोत्रम्

माँ भगवती का यह सुन्दर “श्रीभगवती स्तोत्र”  का रोज पाठ करने वाले के ऊपर भगवती सदा ही प्रसन्न रहती हैं।  व्यास मुनि द्वारा रचित  जय भगवति देवि नमो वरदे, जयपापविनाशिनी बहुफलदे  स्त्रोत  

YouTube ॐ नमो : भगवते वासुदेवाय नमः
॥ मंत्र एवं आरती ॥

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः | हरिनाम माला स्त्रोत

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः , यह श्री भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण दोनों का मंत्र है। इसमें दो परंपराएं हैं

भरतजी का मन्दाकिनी स्नान, चित्रकूट में पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिता का शोक और श्राद्ध
॥ श्री रामचरितमानस ॥

भरतजी का मन्दाकिनी स्नान, चित्रकूट में पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिता का शोक और श्राद्ध

लखन राम सियँ सुनि सुर बानी। अति सुखु लहेउ न जाइ बखानी॥ इहाँ भरतु सब सहित सहाए। मंदाकिनीं पुनीत नहाए॥2॥

श्री रामजी का लक्ष्मणजी को समझाना एवं भरतजी की महिमा कहना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री रामजी का लक्ष्मणजी को समझाना एवं भरतजी की महिमा कहना

सुनि सुर बचन लखन सकुचाने। राम सीयँ सादर सनमाने॥ कही तात तुम्ह नीति सुहाई। सब तें कठिन राजमदु भाई॥3॥ देववाणी

श्री सीताजी का स्वप्न, श्री रामजी को कोल-किरातों द्वारा भरतजी के आगमन की सूचना, रामजी का शोक, लक्ष्मणजी का क्रोध
॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री सीताजी का स्वप्न, श्री रामजी को कोल-किरातों द्वारा भरतजी के आगमन की सूचना, रामजी का शोक, लक्ष्मणजी का क्रोध

उहाँ रामु रजनी अवसेषा। जागे सीयँ सपन अस देखा॥ सहित समाज भरत जनु आए। नाथ बियोग ताप तन ताए॥2॥ उधर

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