Author name: Katha

भरतजी के बाण से हनुमान्‌ का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्‌ संवाद
॥ श्री रामचरितमानस ॥

भरतजी के बाण से हनुमान्‌ का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्‌ संवाद

दोहा : देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि। बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि॥58॥ भरतजी ने आकाश […]

हनुमानजी का सुषेण वैद्य को लाना एवं संजीवनी के लिए जाना, कालनेमि-रावण संवाद, मकरी उद्धार, कालनेमि उद्धार
॥ श्री रामचरितमानस ॥

हनुमानजी का सुषेण वैद्य को लाना एवं संजीवनी के लिए जाना, कालनेमि-रावण संवाद, मकरी उद्धार, कालनेमि उद्धार

जामवंत कह बैद सुषेना। लंकाँ रहइ को पठई लेना॥ धरि लघु रूप गयउ हनुमंता। आनेउ भवन समेत तुरंता॥4॥ जाम्बवान्‌ ने

लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, लक्ष्मणजी को शक्ति लगना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, लक्ष्मणजी को शक्ति लगना

कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध। सिव बिरंचि जेहि सेवहिं तासों कवन बिरोध॥48 ख॥ जो कालस्वरूप हैं, दुष्टों के समूह

अंगद-राम संवाद, युद्ध की तैयारी
॥ श्री रामचरितमानस ॥

अंगद-राम संवाद, युद्ध की तैयारी

इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा॥ अति आदर समीप बैठारी। बोले बिहँसि कृपाल खरारी॥2॥ यहाँ (सुबेल पर्वत

रावण को पुनः मन्दोदरी का समझाना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

रावण को पुनः मन्दोदरी का समझाना

साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ। मंदोदरीं रावनहिं बहुरि कहा समुझाइ॥35 ख॥ सन्ध्या हो गई जानकर दशग्रीव बिलखता हुआ (उदास

अंगदजी का लंका जाना और रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद
॥ श्री रामचरितमानस ॥

अंगदजी का लंका जाना और रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद

चौपाई : इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई॥ कहहु बेगि का करिअ उपाई। जामवंत कह पद सिरु

मन्दोदरी का फिर रावण को समझाना और श्री राम की महिमा कहना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

मन्दोदरी का फिर रावण को समझाना और श्री राम की महिमा कहना

सयन करहु निज निज गृह जाईं। गवने भवन सकल सिर नाई॥ मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ॥3॥

श्री रामजी के बाण से रावण के मुकुट-छत्रादि का गिरना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री रामजी के बाण से रावण के मुकुट-छत्रादि का गिरना

पवन तनय के बचन सुनि बिहँसे रामु सुजान। दच्छिन दिसि अवलोकि प्रभु बोले कृपा निधान॥12 ख॥ पवनपुत्र हनुमान्‌जी के वचन

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